Category: पठन व पढ़कर समझना

प्राथमिक स्तर पर हिन्दी भाषा-शिक्षण हेतु सरल व रोचक पठन सामग्री – एक आवश्यकता

प्राथमिक स्तर पर कक्षा-कक्ष में बच्चों को हिन्दी भाषा पढ़ना सीखने-सिखाने की रणनीतियों के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की पठन सामग्री की आवश्यकता पर राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय क्योड़क में कार्यरत हिन्दी प्राध्यापक डॉ विजय कुमार चावला ने कहा कि कक्षा-कक्ष में केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित रहना और किसी भी अन्य प्रकार की पठन सामग्री का उपयोग ना करने से शिक्षण बोझिल और उबाऊ बन जाता है । भाषा सीखने की प्रक्रिया को आनंदमय बनाने के लिए आज विद्यालय के कक्षा-कक्ष में सरल पठन सामग्री का होना अति अनिवार्य है । ऐसी सामग्री , जिसमें चित्र वाली कहानियाँ , जानकारी परक कार्ड , पोस्टर , कविता चार्ट और बड़ी किताबें शामिल हों । कक्षा-कक्ष में ऐसी कहानी की किताबें , जिनमें केवल चित्र हो शब्द ना हो , होनी चाहिए । इस तरह की पुस्तकें बच्चों के मौखिक भाषा विकास व चर्चा जी के लिए बहुत बढ़िया रहती है । साथ ही इस तरह की किताबों से बच्चों को कहानी में क्रम का भी पता चलता है । इसके बाद उन्होंने डिकोडिंग योग्य पाठ अर्थात डिकोडेबल टेस्ट के बारे में बताया कि इन पाठों का उपयोग बच्चों को उन चिह्नों का अभ्यास करवाने के लिए किया जाता है , जो वे सीख रहे हैं या सीख चुके हैं । इन पाठों के अधिकतर शब्द , वर्ण और मात्राओं से मिलकर बनाए जाते हैं । जिन्हें बच्चे बहुत पहले सीख चुके हैं । इन पाठों को पढ़ने से डिकोडिंग कौशल को और मजबूत बनाने में मदद मिलती है । बड़ी किताबों और बिग बुक्स के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह ऐसी किताब होती है जो आकार में बड़ी हो और जिसमें शब्द और चित्र दोनों ही बड़े होते हैं । यह बड़ी किताब 10 से 12 पन्नों की होनी चाहिए और आकर्षक होनी चाहिए । यह किताबें बच्चों के लिए साझा पठन , संवाद सहित पढ़कर सुनाना जैसी रणनीतियों के लिए काम में ली जाती हैं । इन किताबों के बड़े-बड़े चित्र बच्चों को कहानी से पहले अनुमान लगाने में सहायक होते हैं । इस संदर्भ में उन्होंने एल एल एफ का आभार प्रकट करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र दो दिवसीय कार्यशाला में उन्हें कविता चार्ट और बिग बुक देखने को मिली । जिसके माध्यम से वे प्रेरित हुए और उन्होंने अपने विद्यालय में कक्षा नौवीं की छात्राओं की सहायता से चिड़िया का मोती तथा पूसी और निक्कू दो बड़ी किताबें तैयार की और उनके माध्यम से बच्चों के साथ साझा पठन की रणनीति का प्रयोग भी किया । बच्चों ने कवर पेज , बड़े चित्र को देखा और उन्हें यह किताबें बड़ी पसंद आए । इसके अतिरिक्त प्राथमिक स्तर पर हिन्दी भाषा-शिक्षण हेतु प्राथमिक शिक्षकों के पाँच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने शिक्षकों से सरल व रोचक पठन सामग्री का निर्माण भी करवाया । उन्होंने विद्यालय में आयोजित जीवन कौशल विकास फन कैंप में छात्राओं के माध्यम से सरल पठन सामग्री तैयार करवाई । छात्राओं ने कविता चार्ट , छोटी कहानियों के चार्ट , बड़ी किताब , डिकोडेबल पाठ आदि तैयार किए और उनकी प्रदर्शनी भी लगाई , जिन्हें माता-पिता ,एस॰एम॰सी के सदस्यों ने खूब सराहा ।